A new debate erupted after the statement of former CM Baghel

'झाड़-फूंक vs अस्पताल': धीरेन्द्र शास्त्री के भिलाई आते ही कांग्रेस को क्यों चुभ रहे हैं बागेश्वर सरकार?

स्थान: भिलाई | रिपोर्ट: Durg Times डेस्क

भिलाई के जयंती स्टेडियम में इन दिनों बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की हनुमंत कथा और दिव्य दरबार को लेकर जनसैलाब उमड़ा हुआ है। लाखों की संख्या में श्रद्धालु ‘बाबा’ की एक झलक पाने को बेताब हैं। लेकिन, इस धार्मिक आयोजन के बीच छत्तीसगढ़ की सियासत का पारा भी सातवें आसमान पर है।

क्या है मामला? हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का एक बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने तंज कसते हुए सवाल उठाया है- “जब झाड़-फूंक से इलाज हो रहा है, तो अस्पताल क्यों खोल रहे हैं?” इस बयान ने कांग्रेस और सनातन समर्थकों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है।

आखिर कांग्रेस नेताओं को क्यों लग रही है ‘मिर्ची’? जनता और राजनीतिक विश्लेषकों के मन में सवाल है कि आखिर एक धार्मिक आयोजन पर इतनी तीखी प्रतिक्रिया क्यों? इसके पीछे मुख्य रूप से तीन वजहें मानी जा रही हैं:

सनातन का ‘मास मूवमेंट’: धीरेन्द्र शास्त्री के आयोजनों में जिस तरह लाखों की भीड़ जुट रही है और वे खुलकर ‘हिंदू राष्ट्र’ और सनातन एकता की बात करते हैं, उससे कांग्रेस के एक वोट बैंक को साधने की रणनीति पर असर पड़ता दिख रहा है।

वैचारिक टकराव: कांग्रेस हमेशा से खुद को तर्कवादी और अंधविश्वास विरोधी बताती रही है। भूपेश बघेल का बयान इसी लाइन पर है कि ‘चमत्कार’ पर भरोसा करने की बजाय विज्ञान और चिकित्सा पर भरोसा करना चाहिए। वे इसे ‘अंधविश्वास’ मानकर इसका विरोध कर रहे हैं।

राजनीतिक नरेटिव: भिलाई में इतना बड़ा आयोजन भाजपा और हिंदूवादी संगठनों के लिए शक्ति प्रदर्शन जैसा है। कांग्रेस को लगता है कि बाबा के मंच से निकलने वाले संदेश सीधे तौर पर जनता के मन को प्रभावित कर सकते हैं, जो सियासी तौर पर उनके लिए नुकसानदेह हो सकता है।

जनता की राय जहां एक तरफ कांग्रेस इसे अंधविश्वास से जोड़ रही है, वहीं दूसरी तरफ भिलाई की जनता का उत्साह बता रहा है कि उनके लिए यह आस्था का विषय है। अब देखना यह होगा कि ‘आस्था और विज्ञान’ की इस लड़ाई में आगामी दिनों में और क्या नए बयान सामने आते हैं।

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