रायपुर में आयोजित हिंदू सम्मेलन में Mohan Bhagwat, जो Rashtriya Swayamsevak Sangh के प्रमुख हैं, ने समाज, संस्कृति और नागरिक जिम्मेदारियों पर केंद्रित विस्तृत संबोधन दिया। अपने वक्तव्य में उन्होंने संघ के 100 वर्षों की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि नागपुर की एक छोटी शाखा से शुरू हुआ संगठन आज देश के हर कोने में सक्रिय है।
संघ प्रमुख ने कहा कि समाज में दिखने वाले संकटों पर केवल चर्चा पर्याप्त नहीं, बल्कि उपायों पर अमल ज़रूरी है। उन्होंने एक रूपक कथा के माध्यम से यह संदेश दिया कि भय का समाधान बाहरी आकार या साधनों में नहीं, बल्कि निर्भय हृदय और चेतना में निहित है।
🔑 भाषण के प्रमुख बिंदु (सार)
सामाजिक समरसता: जाति, भाषा, प्रांत, पंथ से ऊपर उठकर सबको अपना मानने का आह्वान।
परिवार व संवाद: सप्ताह में एक दिन परिवार के साथ सामूहिक समय, संवाद और संस्कार।
पर्यावरण संरक्षण: जल-संरक्षण, सिंगल-यूज़ प्लास्टिक से दूरी, वृक्षारोपण।
स्वदेशी व स्वावलंबन: देश में बने उत्पादों के उपयोग पर ज़ोर।
संविधान व नागरिक कर्तव्य: कानूनों का पालन, कर/नियमों के प्रति अनुशासन।
संस्कृति व भाषा: मातृभाषा, परंपरागत वेश-भूषा और सांस्कृतिक आचरण का सम्मान।
उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ 100 वर्ष पूरे होने पर उत्सव से अधिक समाज-सेवा और आत्ममंथन को प्राथमिकता देता है। सम्मेलन के माध्यम से स्वयंसेवकों के ज़रिये ये संदेश समाज तक पहुँचाने की बात कही गई।
📌 निष्कर्ष
रायपुर के हिंदू सम्मेलन में दिया गया यह संबोधन समाज को जोड़ने, आत्मनिर्भरता बढ़ाने और नागरिक अनुशासन को मज़बूत करने पर केंद्रित रहा। वक्तव्य का मूल भाव—संकटों की चर्चा से आगे बढ़कर समाधान को जीवन में उतारना—रहा।

